“भारति, जय, विजय करे” कविता महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी द्वारा लिखी गई एक बहुत ही सुंदर देशभक्ति कविता है। इस कविता में कवि ने भारत माता की आरती उतारी है और उनकी जीत की कामना की है।
यह पाठ कक्षा 9 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘गंगा’ (Chapter 10) से ली गई है है।
कविता का मुख्य सारांश (Main Summary)
इस कविता में भारत देश को एक देवी (भारत माता) के रूप में दिखाया गया है। कवि ने भारत के नक्शे, यहाँ की नदियों, खेतों और पहाड़ों को भारत माता के शरीर और गहनों की तरह बताया है।
इस पूरी कविता को हम कुछ आसान बिंदुओं में समझ सकते हैं:
- हमेशा जीत की कामना: कविता की शुरुआत में कवि प्रार्थना करते हैं कि हे भारत माता! आपकी हमेशा जय हो, यानी हमारा देश हमेशा आगे बढ़े और जीते।
- सोने जैसे खेत और कमल: भारत माता के हाथों में पवित्र कमल का फूल है। यहाँ के खेत फसलों से भरे हैं, जो पकने पर सोने की तरह चमकते हैं। यह दिखाता है कि हमारा देश खुशहाल और समृद्ध है।
- समुद्र धोता है पैर: भारत के दक्षिण में जो सागर (समुद्र) है, उसकी गरजती हुई लहरें ऐसी लगती हैं मानो वे भारत माता के चरणों (पैरों) को धो रही हों। भारत के नीचे स्थित श्रीलंका को भारत माता के पैरों के पास का हिस्सा बताया गया है।
- प्रकृति के सुंदर कपड़े: भारत के हरे-भरे जंगल, पेड़-पौधे, घास और सुंदर फूल भारत माता के रंग-बिरंगे कपड़ों और गहनों की तरह हैं।
- पवित्र नदियाँ और हिमालय: मुकुट की तरह खड़ा हिमालय पर्वत और गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियाँ भारत माता की सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
कठिन शब्दों के सरल अर्थ (Word Meanings)
कविता को अच्छे से समझने के लिए कुछ शब्दों के अर्थ यहाँ दिए गए हैं:
| शब्द | सरल अर्थ (Meaning) |
|---|---|
| भारति | भारत माता / सरस्वती देवी |
| कनक | सोना (Gold) |
| सस्य | फसल या अनाज |
| पदतल | पैरों के नीचे का भाग |
| शतदल | कमल का फूल |
| शुचि | पवित्र या साफ़ |
| चरण युगल | दोनों पैर |
| तरु / तृण | पेड़ / घास |
कविता का मुख्य संदेश (Message)
निराला जी इस कविता के माध्यम से हमें अपने देश से प्यार करना सिखाते हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि हमारा भारत प्रकृति और संस्कृति दोनों से बहुत अमीर है, और हमें हमेशा इसकी रक्षा और सम्मान करना चाहिए।
इस कविता के अर्थ को विस्तार से समझने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को अवश्य देखें।
